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Showing posts from August, 2015

कोरा मन

कोरा मन सबसे अच्छा होता है जिसमे नही होती कोई चिंता दुनियादारी की, जो नही जानता किसी को चाहने की फितरत, जिसका नही होता कोई ईमान, जिसे नही पता दुनिया के सलीके।जो अपनी ही मस्ती में दर बदर घुमकर करता है अल्हङ हरकते। हल्की फुहारो में भीग कर गई कैफे में अपनी पसंदीदा काॅफी दस मिनट से पी रही शांत लङकी भी दरअसल नही है शांत कि उसकी आँखे तलाशती है हर पल कैफे में आते लोगो में किसी का चेहरा। असल में नही होता कोई मन खाली क्युकी ईश्वर ही है इस कला में माहिर और इंसान नही हो सकता है ईश्वर। 

अंत से पहले

एक दिन सारी मुश्किले, सारे दुख खत्म होगें। जिसकी कदर ना कि जायेगी वो भी एक दिन सब को अलविदा कह कर मिलेगा अपने असली रचियता से। शेष रहेंगी बस यादे। मन बार बार तङपने लगता है कि ये सब ओर इतना अहं, दिखावा, ज़हरीलापन, लालच क्यो है।