कोरा मन
कोरा मन सबसे अच्छा होता है जिसमे नही होती कोई चिंता दुनियादारी की, जो नही जानता किसी को चाहने की फितरत, जिसका नही होता कोई ईमान, जिसे नही पता दुनिया के सलीके।जो अपनी ही मस्ती में दर बदर घुमकर करता है अल्हङ हरकते। हल्की फुहारो में भीग कर गई कैफे में अपनी पसंदीदा काॅफी दस मिनट से पी रही शांत लङकी भी दरअसल नही है शांत कि उसकी आँखे तलाशती है हर पल कैफे में आते लोगो में किसी का चेहरा। असल में नही होता कोई मन खाली क्युकी ईश्वर ही है इस कला में माहिर और इंसान नही हो सकता है ईश्वर।