Posts

Showing posts from March, 2019

पहेली

बेतहाशा कोशिशों के बाद भी, तुम्हें जानने में असफल होना, अक्सर मुझे खुद से नाराज़ कर देता है. तुम कोई अनसुलझी पहेली हो, मैं हुँ नौसिखिया कोई. . . . . . . . पहेलियों की दुनिया के सफर से पहले, नहीं घबराया उसका मन आम सफर की तरह. तुम्हारे संग रहने का खयाल भर भी खुशी है. . . . . . . . हाल-ए-दिल की कचहरी में, उसे तलब किया है गुनहगार बना कर, दिल इससे अच्छा और इससे बुरा काम और क्या करता. . . . . . . . . . . . उसका सुकून खाना था, मेरा सुकून वो. . . . . इन दिनों बातें पहेलियों से शुरु होकर उस पर खत्म होती है.