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डियर अननोअन, ईट्स बेटर टू स्टे आउट आॅफ माई लाईफ.

एक और कोशिश है. मैने कई बार बहुत कुछ लिखा और मिटा दिया. कुछ यू की उसका होना कभी था ही नही. मुझे लगा की मै तुम्हे नही लिख सकती उतना अच्छा जितने तुम असल में हो. अतीत से एक गहरा लगाव है मुझे. वो चीज़ो जिसकी चाहना बहुत थी या की अब भी है उनके होने के निशान दर्ज़ है काली स्याही से अतीत के पन्नो में आज भी. किसी ऐकांत कि एक अबूझ खामोशी में आँखो के किनारो से छलकती है नाकामी. एक नज़र भर देखने पर होने लगता है सब सजीव. मन भींच जाता है. कितना कुछ अनकहा रह गया था तब. एक आखिरी खत भेजा था मैने, कोरा. अपने शहर से भेजी थी शहर भर की दुआएं चुराकर. हवा की हल्की आहाट होती है और दोबार आ जाता है असहनीय यथार्थ. खराबी. हर तरफ बिखरी उदासी. गुम सुकून. बेतरह ख़याल और मन मै खानाबदोशो सा बसा एक नाम. डियर अननोअन, ईट्स बेटर टू स्टे आउट आॅफ माई लाईफ.

कोरा मन

कोरा मन सबसे अच्छा होता है जिसमे नही होती कोई चिंता दुनियादारी की, जो नही जानता किसी को चाहने की फितरत, जिसका नही होता कोई ईमान, जिसे नही पता दुनिया के सलीके।जो अपनी ही मस्ती में दर बदर घुमकर करता है अल्हङ हरकते। हल्की फुहारो में भीग कर गई कैफे में अपनी पसंदीदा काॅफी दस मिनट से पी रही शांत लङकी भी दरअसल नही है शांत कि उसकी आँखे तलाशती है हर पल कैफे में आते लोगो में किसी का चेहरा। असल में नही होता कोई मन खाली क्युकी ईश्वर ही है इस कला में माहिर और इंसान नही हो सकता है ईश्वर। 

अंत से पहले

एक दिन सारी मुश्किले, सारे दुख खत्म होगें। जिसकी कदर ना कि जायेगी वो भी एक दिन सब को अलविदा कह कर मिलेगा अपने असली रचियता से। शेष रहेंगी बस यादे। मन बार बार तङपने लगता है कि ये सब ओर इतना अहं, दिखावा, ज़हरीलापन, लालच क्यो है।