डियर अननोअन, ईट्स बेटर टू स्टे आउट आॅफ माई लाईफ.

एक और कोशिश है. मैने कई बार बहुत कुछ लिखा और मिटा दिया. कुछ यू की उसका होना कभी था ही नही.
मुझे लगा की मै तुम्हे नही लिख सकती उतना अच्छा जितने तुम असल में हो.

अतीत से एक गहरा लगाव है मुझे. वो चीज़ो जिसकी चाहना बहुत थी या की अब भी है उनके होने के निशान दर्ज़ है काली स्याही से अतीत के पन्नो में आज भी. किसी ऐकांत कि एक अबूझ खामोशी में आँखो के किनारो से छलकती है नाकामी. एक नज़र भर देखने पर होने लगता है सब सजीव. मन भींच जाता है. कितना कुछ अनकहा रह गया था तब. एक आखिरी खत भेजा था मैने, कोरा. अपने शहर से भेजी थी शहर भर की दुआएं चुराकर.

हवा की हल्की आहाट होती है और दोबार आ जाता है असहनीय यथार्थ. खराबी. हर तरफ बिखरी उदासी. गुम सुकून. बेतरह ख़याल और मन मै खानाबदोशो सा बसा एक नाम.

डियर अननोअन, ईट्स बेटर टू स्टे आउट आॅफ माई लाईफ.





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