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चार सच और एक अधुरी बात

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एक महल था ताश का, एक ख्वाब था कांच का, दोनो बिखरे बैठे है, और तीसरी मैं बैठी हूँ चुप. ********** पैकिंग करते वक़्त मैनें ट्रॉली बैग की सबसे नीचे की चैन में रख ली है कुछ खुशियां छुपा कर. मगर उदासी अभी भी छलक जाती है आँखों से. *********** देर सवेर का एक ख्वाब था, तुम्हारा धुंधलाता हुआ चेहरा, तुम्हारी मिटती हुई आवाज़, और फिर स्याह अंधेरा. हर ओर. मै अक्सर ऐसे ही घबरा कर उठ जाती हूँ. *********** हल्के कत्थई रंग से सज चुकी है शाम, उसकी उदासी का रंग गहरा कर हो गया है स्याह, और फिरोजी रंग की बात निरर्थक है इस बातचीत में, हालांकि उसकी मुस्कान का रंग गुलाबी था. ********** कई दफा मन होता है, तुम से बात करने का, कि कहूँ तुम्हें, जानां! तुम्हारे पास शायद भुल आई हूँ मै. खुदको. **********

रुमानी खयाल

विरह का मौसम अंत की ओर है वसंत की पहली आहट हुई है अभी और सब ओर की जाने लगी अपने हमदर्द से मिलने की मन्नतें, गली की ओर खुलती, इक मुद्दत से बंद खिड़की को खोला गया, और गली के आखरी छोर के पेड़ के नीचे की जगह खंगाली गई, लिखी गई कुछ एक नज्में, कुछ याद किया गया उन्हें, इंद्रधनुष के रंगों से सजाई गई सब दुआएं आसमान पर, तितलियों सी ख्वाहिशें उड़ने लगी चारों ओर, रंग-बिरंगी लिबास में. बरसती फुहारों के बीच, मेरे मन के भीतर चलने लगती है तुम्हारे संग बीते लम्हों की झलक. हर मुमकिन झलक. तुम न हो तो बस यह कुछ रुमानी खयाल ही हैं, जो तुम्हारे न होते हुए भी, ज़र्रे-ज़र्रे में, तुम्हारे होने का एहसास करवाते हैं. हर आस, हर चाह, हर नज़्म मे बस-तुम ओ फरेबी! तुम्हारा शुक्रिया तुम जहाँ भी रहो, खुश रहो, जियो फकत हकीकत में, की रुमानी खयालों की संगत हर दम अच्छी नहीं होती.

वसंत विरह

"तुमने तिलिस्मी दुनिया देखी है?" हर ओर बिखरी होती है वहाँ चाँदनी, कितना तो शोर होता है, निरंतर फूटता शोर, हज़ारों चुप्पीयो के बीच से कही, मन किसी अव्वल दर्जे के जज सा, बैठ जाता है सारी फरियादे सुनने, मन ही पहुंचता है फिर फरियादे लेकर. यह वसंत विरह क्या है? प्रेम की अदालतों में दर्ज है करोड़ों से भी ज्यादा अर्जी़याँ, दुनिया के पहले छोर से आखरी छोर तक के प्रेमियों की, हर दूसरी अर्जी़ में अंकित है बस एक ही शिकायत, "तुम्हारे खत के आख़िर में लिखें सारे वादे झूठे थे जानां" कि वो जो अगली मुलाकात होनी थी, वो कब होगी? होगी या की नहीं? या की वसंत विरह सा गुज़रेगा? या की वसंत वह है जब तुम आओगे.