चार सच और एक अधुरी बात
एक महल था ताश का,
एक ख्वाब था कांच का,
दोनो बिखरे बैठे है,
और तीसरी मैं बैठी हूँ चुप.
**********
पैकिंग करते वक़्त मैनें ट्रॉली बैग की सबसे नीचे की चैन में रख ली है कुछ खुशियां छुपा कर.
मगर उदासी अभी भी छलक जाती है आँखों से.
***********
देर सवेर का एक ख्वाब था,
तुम्हारा धुंधलाता हुआ चेहरा,
तुम्हारी मिटती हुई आवाज़,
और फिर स्याह अंधेरा.
हर ओर.
मै अक्सर ऐसे ही घबरा कर उठ जाती हूँ.
***********
हल्के कत्थई रंग से सज चुकी है शाम,
उसकी उदासी का रंग गहरा कर हो गया है स्याह,
और फिरोजी रंग की बात निरर्थक है इस बातचीत में,
हालांकि उसकी मुस्कान का रंग गुलाबी था.
**********
कई दफा मन होता है,
तुम से बात करने का,
कि कहूँ तुम्हें,
जानां! तुम्हारे पास शायद भुल आई हूँ मै. खुदको.
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एक ख्वाब था कांच का,
दोनो बिखरे बैठे है,
और तीसरी मैं बैठी हूँ चुप.
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पैकिंग करते वक़्त मैनें ट्रॉली बैग की सबसे नीचे की चैन में रख ली है कुछ खुशियां छुपा कर.
मगर उदासी अभी भी छलक जाती है आँखों से.
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देर सवेर का एक ख्वाब था,
तुम्हारा धुंधलाता हुआ चेहरा,
तुम्हारी मिटती हुई आवाज़,
और फिर स्याह अंधेरा.
हर ओर.
मै अक्सर ऐसे ही घबरा कर उठ जाती हूँ.
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हल्के कत्थई रंग से सज चुकी है शाम,
उसकी उदासी का रंग गहरा कर हो गया है स्याह,
और फिरोजी रंग की बात निरर्थक है इस बातचीत में,
हालांकि उसकी मुस्कान का रंग गुलाबी था.
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कई दफा मन होता है,
तुम से बात करने का,
कि कहूँ तुम्हें,
जानां! तुम्हारे पास शायद भुल आई हूँ मै. खुदको.
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