वसंत विरह

"तुमने तिलिस्मी दुनिया देखी है?"

हर ओर बिखरी होती है वहाँ चाँदनी,
कितना तो शोर होता है, निरंतर फूटता शोर,
हज़ारों चुप्पीयो के बीच से कही,
मन किसी अव्वल दर्जे के जज सा,
बैठ जाता है सारी फरियादे सुनने,
मन ही पहुंचता है फिर फरियादे लेकर.

यह वसंत विरह क्या है?

प्रेम की अदालतों में दर्ज है करोड़ों से भी ज्यादा अर्जी़याँ,
दुनिया के पहले छोर से आखरी छोर तक के प्रेमियों की,
हर दूसरी अर्जी़ में अंकित है बस एक ही शिकायत,
"तुम्हारे खत के आख़िर में लिखें सारे वादे झूठे थे जानां"

कि वो जो अगली मुलाकात होनी थी,
वो कब होगी? होगी या की नहीं?
या की वसंत विरह सा गुज़रेगा?
या की वसंत वह है जब तुम आओगे.

Comments

  1. बहुत खूबसूरत

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  2. बहुत ही उम्म्दा👌🏼

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  3. मैंने तिलस्मी दुनिया नही देखी।

    पर देखा है
    तुम्हारे बाद कैसे चमकता है चाँद
    बिन सूरज के,
    हर शोर में भी तुम्हारी
    आवाज़ साफ़ सुनाई देती है।
    अक्षर दर अक्षर

    तुम्हारे दिल की चुप्पी लड़ती है
    मुक़दमा।
    किसी वक़ील सा
    और सुन लेती है फ़ैसला
    ख़ुद जज बन कर।

    देखो सब तिलस्म ही तो है न?
    बहोत ख़ूबसूरत लिखा है आपने। 🙏🏻

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    1. अरे! आपका जवाब भी लाजवाब था। 😊
      आपका शुक्रिया।😊

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