शहर दिल्ली
किसी एक सवाल के जवाब के लिए हम अनजाने ही बुनने लगते हैं कई सारे नए सवाल. फिर हम खोजने लगते हैं उन नए सवालों के जवाबों को. इन सवालों के जवाबों में फिर उभर आते हैं इनमें छुपे नए सवाल.
जाने हम क्या ढूंढने आए थे इतनी दूर.
जाने अब क्या ढूंढना पड़ रहा है.
. . . . . . .
दिल्ली की सड़कों पर
चलती हूं मैं ,
हलका बस्ता
और भारी मन लिए.
. . . . . .
दिल्ली के रास्ते बहुत लंबे हैं,
यहां की रातें जाने किस उजाले से रोशन है,
यहां बारिशे बहुत कम होती है,
यहां हम घूमते हैं अनचाही मुस्कान लिए,
यहां हमारे शहर सा कुछ नहीं है.
यहां किसी मोड़ पर चलते हुए,
तुम से टकरा जाना नहीं होता.
. . . . . . .
दिल्ली की धुंध भरी किसी शाम में,
एक फिकी मुस्कान के साथ उसने
अलाव में हाथ सेकते हुए कहा,
"हम शहर बदल सकते हैं,
मगर अपने इन हालातों का क्या करेंगे?"
. . . . . . .
दिल्ली की किसी सड़क पर बैठे हुए,
मैं लिख रही हूं दिल्ली के किस्से
और कोई नाम है जो स्मृति में है.
स्मृति जो मिट जानी चाहिए,
उसके हमें मिटा देने से पहले.
जाने हम क्या ढूंढने आए थे इतनी दूर.
जाने अब क्या ढूंढना पड़ रहा है.
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दिल्ली की सड़कों पर
चलती हूं मैं ,
हलका बस्ता
और भारी मन लिए.
. . . . . .
दिल्ली के रास्ते बहुत लंबे हैं,
यहां की रातें जाने किस उजाले से रोशन है,
यहां बारिशे बहुत कम होती है,
यहां हम घूमते हैं अनचाही मुस्कान लिए,
यहां हमारे शहर सा कुछ नहीं है.
यहां किसी मोड़ पर चलते हुए,
तुम से टकरा जाना नहीं होता.
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दिल्ली की धुंध भरी किसी शाम में,
एक फिकी मुस्कान के साथ उसने
अलाव में हाथ सेकते हुए कहा,
"हम शहर बदल सकते हैं,
मगर अपने इन हालातों का क्या करेंगे?"
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दिल्ली की किसी सड़क पर बैठे हुए,
मैं लिख रही हूं दिल्ली के किस्से
और कोई नाम है जो स्मृति में है.
स्मृति जो मिट जानी चाहिए,
उसके हमें मिटा देने से पहले.
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